Wednesday, April 1, 2009

~*~दिल एक खिलोना~*~


~*~दिल एक खिलोना~*~

एक मासूम सा दिल आज पत्थर हो गया
था कभी वो अपना आज जखम दे गया


भरी महफ़िल मैं रुसवा हमें किया गया
सुहानी ज़िंदगी मैं रंज-ओ-गम भर गया


लाखो मे एक ऐसा फूल चुना था
वही कांटो से गहरी चुभन दे गया



अपना बना के भूल जाना खेल हो गया
रिश्ते बनाके निभाना उन्हे ना आया


डाली से फूल को जुदा करना हमें ना आया
जाने दिलों को तोड़ने का हुनर उन्हे कैसे आया


इलेश 1-4-2009

18 comments:

हरि said...

बहुत खूब।
लाखों में एक ऐसा फूल चुना था
वही कांटो से गहरी चुभन दे गया

अच्‍छा लिखा है।

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब रचना.

रामराम.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बहुत सुन्दर रचना.....आभार

Harkirat Haqeer said...

डाली से फूल जुदा करना हमें आता नहीं
जाने दिल तोड़ने का हूनर उन्हें कैसे आ गया ...

वाह वाह ...!! बहोत खूब....!!

इलिश जी बहोत सुन्दर.......!!

राज भाटिय़ा said...

एक मासूम सा दिल आज पत्थर हो गया
था कभी वो अपना आज जखम दे गया
वाह भाई जबाब नही, बहुत सुंदर.
धन्यवाद

रज़िया "राज़" said...

एक मासूम सा दिल आज पत्थर हो गया
था कभी वो अपना आज जखम दे गया
वाह! क्या कहने!

Nirmla Kapila said...

ye dil bhi na... bahut badiyaa kavita ke liye badhai ye dil hee to aapko kavi bhi bana gaya

दिगम्बर नासवा said...

लाखो मे एक ऐसा फूल चुना था
वही कांटो से गहरी चुभन दे गया
बहूत खूबसूरत ग़ज़ल..........
लाजवाब शेर सब के सब, पर ये ख़ास

sandhyagupta said...

लाखो मे एक ऐसा फूल चुना था
वही कांटो से गहरी चुभन दे गया

Bahut khub likha hai.Badhai.

*KHUSHI* said...

bahot khoob likha hai ileshji..

Dr.Bhawna said...

डाली से फूल को जुदा करना हमें ना आया
जाने दिलों को तोड़ने का हुनर उन्हे कैसे आया

बहुत सुंदर भाव...

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

Bahut achcha likha hai aapne..

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत कम शब्द बहुत गहरी बात लाज़बाब शब्दों की इतनी किफायत काबिले तारीफ़ है वाह वाह
मेरी ब्लॉग जगत से लम्बी अनुपस्तिथि के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ

Babli said...

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

Bahadur Patel said...

bahut badhiya hai.

अविनाश वाचस्पति said...

दिल एक खिलौना

पर इसे न कहो

कि खिलो ना

इसे कहो खिलो हां

सुमित तोमर said...

ओ तुसी छा गए पा जी...

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